चिन्ता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो
चिन्ता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो सभी प्राणी सुख के अभिलाषी होते हैं। मानव एक बुिद्धजीवी प्राणी है। अत: वह सुख की अभिलाषा में बड़ी-बड़ी योजनाए¡ बनाता है। विभिन्न संसाधन जुटाता है। भौतिक, सामाजिक व आध्याित्मक उन्नति के लिए ...
santosh rashtrapremi द्वारा 27 जून, 2008 3:47:00 PM IST पर पोस्टेड
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तुम ही ईश्वर तुम ही भर्ता, तुम ही जग के पालनकर्ता।
सर्वोच्च कर्म है कृषक तुम्हारा, तुम ही सबके संकटहर्ता।।
तुम ही ईश्वर तुम ही ईश्वर तुम ही भर्ता, तुम ही जग के पालनकर्ता। सर्वोच्च कर्म है कृषक तुम्हारा, तुम ही सबके संकटहर्ता।। शीत ऋतु में ठिठुर-ठिठुर कर, बिन कपड़ों के रहता तू। और निशा में जाग-जाग कर, कर्म-यज्ञ है करता तू। श्रम-सीकर हैं संपत्ति ...
santosh rashtrapremi द्वारा 28 जून, 2008 1:00:00 PM IST पर पोस्टेड
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आर्दश
आर्दश आदर्श दीवारों पर लिखने के लिए होते हैं, चलते समय नीचे देखकर चलना पड़ता है। यदि चलते समय दीवारों पर लिखे आदर्शो पर दृष्टि रखते हुए भी अपना लक्ष्य या गंतव्य पा लिया और आदर्शोँ को व्यवहारिकता को प्रमाणित कर दिया तो भी लोग आदर्शोँ का अनुकरण नहीं ...
santosh rashtrapremi द्वारा 18 जून, 2008 3:06:00 AM IST पर पोस्टेड
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