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प्रवचन

संत


प्रवचन


`ये सन्त दारू पीते हैं और भी न जाने क्या-क्या करते हैं? मैं अपने छात्र/छात्राओं से कहती हू¡ कि इनकी बातों में क्या रखा है? इनसे अच्छे प्रवचन तो मैं दे लेती हू¡।´ एक शिक्षिका महोदया अपने शिक्षक साथी से सी.बी.एस्.ई. के एक मूल्यांकन केन्द्र पर मूल्यांकन कार्य करते हूए कह रहीं थीं।
थोड़ी देर उपरान्त वही शिक्षिका महोदया उनसे मुखातिव हुईं, `सर! मैं अपने भाई के यहा¡ ठहरी हू¡। किसी होटल वाले से होटल में ठहरने का बिल बनवा दीजिए ना। सी.बी.एस्.ई. से होटल का खर्चा तो लेना ही है।´ शिक्षक को उनका प्रवचन समझ में आ गया।

अस्वीकरण