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अप्रैल 2008


ब्लॉग्स (4)
यहाँ वही है हंसता दिखता स्वार्थ ही हमको नित्य रुलाता, स्वार्थ ही नित तड़फाता है।यहाँ वही है हंसता दिखता, नित रोकर जो गाता है।।तू काँटों को फूल समझ ले,आग को ही तू कूल समझ लेभूल हुई जो सुधर न सकती,खुशियाँ अपनी धूल समझ ले।जो भी बनता साथी ... और पढ़ें...

एक मुकुन्दपुर नाम का एक गॉव था। गॉव के पास ही एक कच्ची सड़क थी वह सड़क ही मुख्यत: वहा¡ से आने जाने का एक साधन थी। उसी गॉव में राधा नाम की एक औरत रहती थी, बेचारी के एक बेटा था। वह दिन भर कड़ा परिश्रम करती तब जाकर खाने पीने की व्यवस्था कर पाती। खाने-पीने के ... और पढ़ें...

दुर्घटना ? सरोज के पिता ऑफिस के काम में व्यस्त थे कि तभी चपरासी ने आकर कहा आपका फोन आया है´´ बाबूजी। जयदेव ने नजर उठाकर चपरासी को पूछा- कहा¡ से आया है।´´ रामनगर से बाबूजी। रामनगर से, विशेष उत्सुकता के साथ जयदेव उठकर टेलीफोन के पास ... और पढ़ें...