दुर्घटना ?
सरोज के पिता ऑफिस के काम में व्यस्त थे कि तभी चपरासी ने आकर कहा ``आपका फोन आया है´´ बाबूजी। जयदेव ने नजर उठाकर चपरासी को पूछा- ``कहा¡ से आया है।´´ रामनगर से बाबूजी। रामनगर से, विशेष उत्सुकता के साथ जयदेव उठकर टेलीफोन के पास पहु¡चा। और टेलीफोन उठाया ही था कि दूसरी तरफ से सुनायी पड़ा कि मैं सरोज की पड़ोसन बोल रही हू¡। आज सरोज की मृत्यु हो गयी है। बताया जाता है कि स्टोव फटने से सरोज जल गयी है।उसके अन्तिम संस्कार की शीघ्रता से तैयारी की जा रही है। सम्भव है आपके आने से पूर्व ही सरोज की चिता को आग लगा दी जाय आप तुरन्त चले आइये।
जयदेव में काटो तो खून नहीं। पत्थर की मूर्ति की तरह खड़ा रह गया। कल ही सरोज का पत्र आया था कि मुझे बहुत तंग किया जा रहा है। कई-कई दिन तक खाना नहीं मिलता। कमरे में बंद कर दिया जाता है। मुझे मारने की धमकी दी जाती है। उन्होंने तो साफ कह दिया है कि या तो स्कूटर दिला दे वरना तुझे हटा कर दूसरी शादी कर लू¡गा। लेकिन इस समय इस पर विचार करने का समय नहीं था। जयदेव ने आकिस्मक छुट्टी के लिये प्रार्थना पत्र लिखा तथा ऑफिस से बाहर टेक्सी स्टेन्ड पर आया।
टेक्सी स्टेन्ड से टेक्सी पकड़कर रामनगर चल दिया। रामनगर पहु¡चने में तीन घण्टे लगे। वहा¡ पर सरोज की लाश का पंचनामा भरवाकर जलाया जा चुका था। वहा¡ उसे बताया गया कि सुबह 8 बजे चाय बनाते समय स्टोव फटा और सरोज इस दुनिया में नहीं रही। सरोज की हत्या कर उसे मौत का रूप दिया जा चुका था। जब कि घर में ऐसी दुघZटना के कोई सबूत नहीं मिले थे। जयदेव ने सरकारी थानों, कचहरी एवं न्यायालयों के खूब चक्कर लगाये किन्तु एक निरीह अबला की हत्या को मौत में बदल दिया गया। सबके सामने एक ही प्रश्न होता हत्या या दुर्घटना ?

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