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जून 2008


ब्लॉग्स (9)
तुम ही ईश्वर तुम ही ईश्वर तुम ही भर्ता, तुम ही जग के पालनकर्ता।सर्वोच्च कर्म है कृषक तुम्हारा, तुम ही सबके संकटहर्ता।।शीत ऋतु में ठिठुर-ठिठुर कर,बिन कपड़ों के रहता तू।और निशा में जाग-जाग कर,कर्म-यज्ञ है करता तू।श्रम-सीकर हैं संपत्ति तेरी, सबका ... आगे पढ़ें...

चिन्ता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो सभी प्राणी सुख के अभिलाषी होते हैं। मानव एक बुिद्धजीवी प्राणी है। अत: वह सुख की अभिलाषा में बड़ी-बड़ी योजनाए¡ बनाता है। विभिन्न संसाधन जुटाता है। भौतिक, सामाजिक व आध्याित्मक उन्नति के लिए ... आगे पढ़ें...

=color: >आधुनिकता हमारे पास कोठी,बंगला,कारचलते,ग... आगे पढ़ें...