='color: ;'>आधुनिकता
हमारे पास
कोठी,बंगला,कार
चलते,गाते,घूमते
कहीं से भी
मोबाइल के द्वारा
करें प्रस्ताव स्वीकार
विकास की ओर
अग्रसर हैं हम
दूध की बातें छोड़ों
आधुनिक बनो
विकसित कहलाओ
रम से नाता जोड़ो
परिवार,शादी!
कैसी बातें करते हो?
वसुधैव कुटुंबकम् का भाव तजते हो
सभी अपने हैं।
जिसके साथ
जितने दिन
प्रेम से रह सको रहो
किसी से टकराव,
विभिन्न प्रकार के समझौते,
क्यों ?
मौज-मस्ती में खलल डालते हो
बंधन,उत्तरदायित्व,कर्तव्य,
ये सब,
जीवन में विष की तरह हैं?
जीवन में ,
विष घोलने की अपेक्षा,
अलग होकर,
अलग पथ पर
अपने-अपने साथी तलाश लो।
आधुनिकता का न ह्रास हो।

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