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कविता कहाँ? अब खो गई है?
कविता कहाँ? अब खो गई है? कविता कहाँ? अब खो गई है?बीज शान्ति के, बो गई है।। शान्ति मृत्यु की, मानो छाया, जीवन-विहीन ही, चलती काया। खोया प्रेम, ईर्ष्या नहीं ...
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santosh rashtrapremi
द्वारा 26 अगस्त, 2008 4:17 PM पर पोस्टेड
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हमसे दिल न लगाना तुम दिल के टुकड़े हो जायें।
मुस्कान लुटाएं हम राह के पक्षी है,जाने किधर को उड़ जायें।हमसे दिल न लगाना तुम दिल के टुकड़े हो जायें।अपरिचित दोंनो परिचित हो गयेरंगरीले ख्वावों में खो गयेसमय बिताने को मिलकर के ,प्रेम भरे गाने कुछ गायें। हम राह के पक्षी है,जाने किधर को उड़ ...
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santosh rashtrapremi
द्वारा 17 अगस्त, 2008 7:34 AM पर पोस्टेड
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स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, पर स्वतंत्र का अर्थ नहीं जाना।। अधिकारॊं को झगड़ रहे नित, कर्तव्यो को ठुकराना॥
स्व-तंत्रता दिवस मनाते हैं पर स्वतंत्र का अर्थ नहीं जाना। स्व-तंत्र को तो ध्वस्त करें नित, गायें स्वतंत्रता का गाना।।स्वतंत्र हुए स्वच्छन्द नहीं, सबको पड़ेगा समझाना। तोड-फोड़ कर आग लगाते,लक्ष्य विकास का यू¡ पाना?सार्वजनिक सम्पत्ति अपनी, समझ के घर ही ले ...
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santosh rashtrapremi
द्वारा 14 अगस्त, 2008 7:07 PM पर पोस्टेड
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