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सितंबर 2008


ब्लॉग्स (2)
तलाशकिससे कहू¡?व्यथा,अपने मन की,कमी न है,कूलर,कार,िफ्रज, बंगला,कम्प्यूटर और टेलीविजन की।किससे कहू¡?कि मैंअच्छा था,गरीब,असभ्य,और अनपढ़,किससे कहू¡?कि मेरी अमूल्य वस्तु,विधाता की देन,सभ्यता में आकर,बिखर गयी है कहीं,और मुझे उसी की है तलाश! आगे पढ़ें...

नहीं चाहिए मुझे ईमानदारी का तमगा मैं कर सकता/सकती हूं कुछ भी,आखिर !बड़ी-बड़ी डिग्री हैं मेरे पास!!मैं भारत का/की शिक्षित नर/नारी हूं¡मैं हूं सशक्त, नहीं बिचारा/बिचारी हूं।मैं जानता/जानती चैंटिंग और ब्लागिंगमैं अंग्रेजी में ... आगे पढ़ें...