समस्त मित्रो को विजयादशमी की शुभ कामनाये इस आशा के साथ कि हम अपने दुर्गुणों को दूर करते हुए अपने आप को पूर्णता की और ले जाने के प्रयत्न करेगे । अपने परिवार,समाज,देश व् विश्व के लिए हर त्याग करने की सामर्थ्य जुटाने की कोशिश करेगे. www.rashtrapremi.com आगे पढ़ें...
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सम्बन्धों के आवरणों में /संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमीयहाँ नहीं है कोई किसी का, सबका सबसे नाता है।सम्बन्धों के आवरणों में, हमको स्वार्थ ही भाता है।।सब अपने हैं, सभी पराये,दुश्मन को भी, मीत बनायेंअपना हित ना सधता हो तो,मित्रों को भी दूर ... आगे पढ़ें...
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तलाशकिससे कहू¡?व्यथा,अपने मन की,कमी न है,कूलर,कार,िफ्रज, बंगला,कम्प्यूटर और टेलीविजन की।किससे कहू¡?कि मैंअच्छा था,गरीब,असभ्य,और अनपढ़,किससे कहू¡?कि मेरी अमूल्य वस्तु,विधाता की देन,सभ्यता में आकर,बिखर गयी है कहीं,और मुझे उसी की है तलाश! आगे पढ़ें...
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नहीं चाहिए मुझे ईमानदारी का तमगा मैं कर सकता/सकती हूं कुछ भी,आखिर !बड़ी-बड़ी डिग्री हैं मेरे पास!!मैं भारत का/की शिक्षित नर/नारी हूं¡मैं हूं सशक्त, नहीं बिचारा/बिचारी हूं।मैं जानता/जानती चैंटिंग और ब्लागिंगमैं अंग्रेजी में ... आगे पढ़ें...
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कविता कहाँ? अब खो गई है? कविता कहाँ? अब खो गई है?बीज शान्ति के, बो गई है।। शान्ति मृत्यु की, मानो छाया, जीवन-विहीन ही, चलती काया। खोया प्रेम, ईर्ष्या नहीं ... आगे पढ़ें...
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मुस्कान लुटाएं हम राह के पक्षी है,जाने किधर को उड़ जायें।हमसे दिल न लगाना तुम दिल के टुकड़े हो जायें।अपरिचित दोंनो परिचित हो गयेरंगरीले ख्वावों में खो गयेसमय बिताने को मिलकर के ,प्रेम भरे गाने कुछ गायें। हम राह के पक्षी है,जाने किधर को उड़ ... आगे पढ़ें...
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स्व-तंत्रता दिवस मनाते हैं पर स्वतंत्र का अर्थ नहीं जाना। स्व-तंत्र को तो ध्वस्त करें नित, गायें स्वतंत्रता का गाना।।स्वतंत्र हुए स्वच्छन्द नहीं, सबको पड़ेगा समझाना। तोड-फोड़ कर आग लगाते,लक्ष्य विकास का यू¡ पाना?सार्वजनिक सम्पत्ति अपनी, समझ के घर ही ले ... आगे पढ़ें...
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गाली देंगे दुनियां वाले, हमें छोड़ तुम मुड़ जाओगे। आगे पढ़ें...
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तेरे ही हित मैं पडा, सहता रहता कष्ट । तेरा तो अर्जन करू¡, दूजी होती नष्ट ।।बुजुर्गोँ को साक्षर करें, यही हमारी रीत ।कुसुमों की वय है पड़ी,क्या चिन्ता है मीत ।।साक्षरता के नाम पर, अरबों दिये बहाय ।प्राथमिक शिक्षा हेतु ये, आ¡सू रहे गिराय ।।किसको ... आगे पढ़ें...
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तुम ही ईश्वर तुम ही ईश्वर तुम ही भर्ता, तुम ही जग के पालनकर्ता।सर्वोच्च कर्म है कृषक तुम्हारा, तुम ही सबके संकटहर्ता।।शीत ऋतु में ठिठुर-ठिठुर कर,बिन कपड़ों के रहता तू।और निशा में जाग-जाग कर,कर्म-यज्ञ है करता तू।श्रम-सीकर हैं संपत्ति तेरी, सबका ... आगे पढ़ें...
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चिन्ता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो सभी प्राणी सुख के अभिलाषी होते हैं। मानव एक बुिद्धजीवी प्राणी है। अत: वह सुख की अभिलाषा में बड़ी-बड़ी योजनाए¡ बनाता है। विभिन्न संसाधन जुटाता है। भौतिक, सामाजिक व आध्याित्मक उन्नति के लिए ... आगे पढ़ें...
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=color: >आधुनिकता हमारे पास कोठी,बंगला,कारचलते,ग... आगे पढ़ें...
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आर्दश आदर्श दीवारों पर लिखने के लिए होते हैं, चलते समय नीचे देखकर चलना पड़ता है। यदि चलते समय दीवारों पर लिखे आदर्शो पर दृष्टि रखते हुए भी अपना लक्ष्य या गंतव्य पा लिया और आदर्शोँ को व्यवहारिकता को प्रमाणित कर दिया तो भी लोग आदर्शोँ का अनुकरण नहीं करेंगे। ... आगे पढ़ें...
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आत्म हत्या रो-रो के बुरा हाल था मीना का एक यही तो साधन था उसके पास अपने अन्त:करण से अपनी पीड़ा को निकालने का। अपने बोझ को हल्का करने का। दिन में तो इसके लिये भी समय नहीं था। पूरे दिन काम ही काम। सुबह तीन बजे उठना ... आगे पढ़ें...
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आदर्श बदला सुनहरा प्रभात था। प्रकृति की छटा अनुपम बनी थी। वृक्षों पर कोयलें चहक रहीं थीं। खेतों में फसलों पर ओस के कण ऐसे लग रहे थे मानो मोती लगे हों। कितना सुन्दर था प्रकृति का मनोहारी श्रृंगार, पुष्प ही पुष्प------ सरसों के खेतों में पीले फूल लगे थे ... आगे पढ़ें...
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